Preetibala

Munshi Premchand ki Kahani "DHIKKAR"


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अनाथ और विधवा मानी के लिए जीवन में अब रोने के सिवा दूसरा अवलम्‍ब न था । वह पांच वर्ष की थी, जब पिता का देहांत हो गया। माता ने किसी तरह उसका पालन किया । सोलह वर्ष की अवस्‍था में मुहल्‍लेवालों की मदद से उसका विवाह भी हो गया पर साल के अंदर ही माता और ‍पति दोनों विदा हो गए।

कहानी : धिक्कार 

लेखक : प्रेमचंद 

स्वर : प्रीतिबाला

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PreetibalaBy Preeti Bala Kumar