Suno Kahaniyan

Nai Roshani story by Rabindranath Tagore


Listen Later

https://youtu.be/stb9v0SkR4o नई रोशनी , रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखी कहानी ।बाबू अनाथ बन्धु बीए में पढ़ते थे. परन्तु कई वर्षों से निरन्तर फ़ेल हो रहे थे. उनके सम्बन्धियों का विचार था कि वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण हो जाएंगे, पर इस वर्ष उन्होंने परीक्षा देना ही उचित न समझा. इसी वर्ष बाबू अनाथ बन्धु का विवाह हुआ था. भगवान की कृपा से वधू सुन्दर सद्चरित्रा मिली थी. उसका नाम विन्ध्यवासिनी था. किन्तु अनाथ बाबू को इस हिंदुस्तानी नाम से घृणा थी. पत्नी को भी वह विशेषताओं और सुन्दरता में अपने योग्य न समझते थे. परन्तु विन्ध्यवासिनी के हृदय में हर्ष की सीमा न थी. दूसरे पुरुषों की अपेक्षा वह अपने पति को सर्वोत्तम समझती थी. ऐसा मालूम होता था कि किसी धर्म में आस्था रखने वाले श्रध्दालु व्यक्ति की भांति वह अपने हृदय के सिंहासन पर स्वामी की मूर्ति सजाकर सर्वदा उसी की पूजा किया करती थी. इधर अनाथ बन्धु की सुनिये! वह न जाने क्यों हर समय उससे रुष्ट रहते और तीखे-कड़वे शब्दों से उसके प्रेम-भरे मन को हर सम्भव ढंग पर जख्मी करते रहते. अपनी मित्र-मंडली में भी वह उस बेचारी को घृणा के साथ स्मरण करते.
जिन दिनों अनाथ बन्धु कॉलेज में पढ़ते थे उनका निवास ससुराल में ही था. परीक्षा का समय आया, किन्तु उन्होंने परीक्षा दिये बग़ैर ही कॉलेज छोड़ दिया. इस घटना पर अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा विन्ध्यवासिनी को अधिक दु:ख हुआ. रात के समय उसने विनम्रता के साथ कहना आरम्भ किया- प्राणनाथ! आपने पढ़ना क्यों छोड़ दिया? थोड़े दिनों का कष्ट सह लेना कोई कठिन बात न थी. पढ़ना-लिखना कोई बुरी बात तो नहीं है.
पत्नी की इतनी बात सुनकर अनाथ बन्धु के मिज़ाज का पारा 120 डिग्री तक पहुंच गया. बिगड़कर कहने लगे, पढ़ने-लिखने से क्या मनुष्य के चार हाथ-पांव हो जाते हैं? जो व्यक्ति पढ़-लिखकर अपना स्वास्थ्य खो बैठते हैं उनकी दशा अन्त में बहुत बुरी होती है.
पति का उत्तर सुनकर विन्ध्यवासिनी ने इस प्रकार स्वयं को सांत्वना दी जो मनुष्य गधे या बैल की भांति कठिन परिश्रम करके किसी-न-किसी प्रकार सफल भी हो गये, परन्तु कुछ न बन सके तो फिर उनका सफल होना-न-होना बराबर है.
इसके दूसरे दिन पड़ोस में रहने वाली सहेली कमला विन्ध्यवासिनी को एक समाचार सुनाने आई. उसने कहा, आज हमारे भाई बीए की परीक्षा में उत्तीर्ण हो गये. उनको बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ा, किन्तु भगवान की कृपा से परिश्रम सफल हुआ.
कमला की बात सुनकर विन्ध्य ने समझा कि पति की हंसी उड़ाने को कह रही है. वह सहन कर गई और दबी आवाज से कहने लगी, बहन, मनुष्य के लिए बीए पास कर लेना कोई कठिन बात नहीं परन्तु बीए पास कर लेने से होता क्या है? विदेशों में लोग बीए और एमए पास व्यक्तियों को घृणा की दृष्टि से देखते हैं.
****
विन्ध्यवासिनी ने जो बातें कमला से कही थीं वे सब उसने अपने पति से सुनी थीं, नहीं तो उस बेचारी को विलायत का हाल क्या मालूम था. कमला आई तो थी हर्ष का समाचार सुनाने, किन्तु अपनी प्रिय सहेली के मुख से ऐसे शब्द सुनकर उसको बहुत दु:ख हुआ. परन्तु समझदार लड़की थी. उसने अपने हृदयगत भाव प्रकट न होने दिए. उल्टा विनम्र होकर बोली, बहन, मेरा भाई तो विलायत गया ही नहीं और न मेरा विवाह ऐसे व्यक्ति से हुआ है जो विलायत होकर आया हो, इसलिए विलायत का हाल मुझे कैसे मालूम हो सकता है? इतना कहकर कमला अपने घर चली गई.
किन्तु कमला का विनम्र स्वर होते हुए भी ये बातें विन्ध्य को अत्यन्त कटु प्रतीत हुईं. वह उनका उत्तर तो क्या देती, हां एकान्त में बैठकर रोने लगी.
इसके कुछ दिनों पश्चात् एक अजीब घटना घटित हुई जो विशेषत: वर्णन करने योग्य है. कलकत्ता से एक धनवान व्यक्ति जो विन्ध्य के पिता राजकुमार के मित्र थे, अपने कुटुम्ब-सहित आये और राजकुमार बाबू के घर अतिथि बनकर रहने लगे. चूंकि उनके साथ कई आदमी और नौकर-चाकर थे इसलिए जगह बनाने को राजकुमार बाबू ने अनाथ बन्धु वाला कमरा भी उनको सौंप दिया और अनाथ बन्धु के लिए एक और छोटा-सा कमरा साफ़ कर दिया. यह बात अनाथ बन्धु को बहुत बुरी लगी. तीव्र क्रोध की दशा में वह विन्ध्यवासिनी के पास गये और ससुराल की बुराई करने लगे, साथ-ही-साथ उस निरपराधिनी को दो-चार बातें सुनाईं.
विन्ध्य बहुत व्याकुल और चिन्तित हुई किन्तु वह मूर्ख न थी. उसके लिए अपने पिता को दोषी ठहराना योग्य न था किन्तु पति को कह-सुनकर ठण्डा किया. इसके बाद एक दिन अवसर पाकर उसने पति से कहा कि, अब यहां रहना ठीक नहीं. आप मुझे अपने घर ले चलिये. इस स्थान पर रहने में सम्मान नहीं है.
अनाथ बन्धु परले सिरे के घमण्डी व्यक्ति थे. उनमें दूरदर्शिता की भावना बहुत कम थी. अपने घर पर कष्ट से रहने की अपेक्षा उन्होंने ससुराल का अपमान सहना अच्छा समझा, इसलिए आना-कानी करने लगे.
किन्तु विन्ध्यवासिनी ने न माना और कहने लगी, यदि आप जाना..
...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Suno KahaniyanBy Poonam


More shows like Suno Kahaniyan

View all
Kahani Jaani Anjaani - Weekly Hindi Stories by Piyush Agarwal

Kahani Jaani Anjaani - Weekly Hindi Stories

33 Listeners

Kahani Suno | कहानी सुनो (कहानियों व उपन्यासों का संसार) by Sameer Goswami

Kahani Suno | कहानी सुनो (कहानियों व उपन्यासों का संसार)

30 Listeners