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May 25, 2021NAMUKKAMAL3 minutesPlayबस यूँ ही इक रात तुम मेरे सपनों मे टहले आंयी थी।मेरे बेहरनगी सीने में माथा रख़ तुम धड़कन गिन रही थी ,मै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में फसी उलझनों को सुलझा रहा था ,और तुम मुसलसल, अपनी पलकें मीच रही थी।...moreShareView all episodesBy madhav sharmaMay 25, 2021NAMUKKAMAL3 minutesPlayबस यूँ ही इक रात तुम मेरे सपनों मे टहले आंयी थी।मेरे बेहरनगी सीने में माथा रख़ तुम धड़कन गिन रही थी ,मै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में फसी उलझनों को सुलझा रहा था ,और तुम मुसलसल, अपनी पलकें मीच रही थी।...more
बस यूँ ही इक रात तुम मेरे सपनों मे टहले आंयी थी।मेरे बेहरनगी सीने में माथा रख़ तुम धड़कन गिन रही थी ,मै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में फसी उलझनों को सुलझा रहा था ,और तुम मुसलसल, अपनी पलकें मीच रही थी।
May 25, 2021NAMUKKAMAL3 minutesPlayबस यूँ ही इक रात तुम मेरे सपनों मे टहले आंयी थी।मेरे बेहरनगी सीने में माथा रख़ तुम धड़कन गिन रही थी ,मै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में फसी उलझनों को सुलझा रहा था ,और तुम मुसलसल, अपनी पलकें मीच रही थी।...more
बस यूँ ही इक रात तुम मेरे सपनों मे टहले आंयी थी।मेरे बेहरनगी सीने में माथा रख़ तुम धड़कन गिन रही थी ,मै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में फसी उलझनों को सुलझा रहा था ,और तुम मुसलसल, अपनी पलकें मीच रही थी।