कई साल पहले मेरा ही लिखा हुआ कुछ किताबो में आया था , तब वो सिर्फ किताबो तक ही सिमट कर रह गया था । इतने समय के बाद सोचा मेरे ही लिखे हुए को किताबो से निकाला जाए और नए रंग रूप में उसको फिर से पेश किया जाए । कारण कुछ नही था बस एक कोशिश थी पुराने को नए तरीके से लाने की और देखने कि की हम अपनी जीवन के साथ भी ऐसा कर सकते है की नही ।