आज निदा फ़ाज़ली की बरसी है. निदा फ़ाज़ली उर्दू-हिन्दी के मकबूल शायर हैं उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए कई खूबसूरत गीत भी लिखे हैं और गज़लें भी. कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता और होश वालों को खबर क्या का जि़क्र उनकी फिल्मी पहचान के लिए काफी हैं.
निदा की पहचान अपनी बात पूरी बेबाकी से और ईमानदारी से कहने वाले शायर की थी. उनके मिज़ाज़ को उनके ही शब्दों में यूं बयां कर सकते हैं. ‘बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी , सलीक़ा चाहिए आवारगी में.आइए सुनते हैं , निदा साब को .......