कहानी का सार यह है कि इस दुनिया में पर्याप्त से कहीं ज़्यादा सम्पत्ति है, इतनी कि सभी लोग सुखी रह सकें। लेकिन कब्ज़ा करने और इकट्ठा करने की ऐसी होड़ मची है कि यह असम्भव है। दुनिया आज इतनी सम्पन्न हो सकती है कि किसी को भी कोई अभाव न रहे, लेकिन, लेकिन कुछ लोग इतने पाग़ल और दीवाने हैं कि लगे हैं धन इकट्ठा करने में। धन के प्रति ऐसी आसक्ति विक्षिप्तता की निशानी है। आज सारा उपद्रव, हत्या, चोरी, लूट-मार, युद्ध इत्यादि के पीछे यही आसक्ति है।