Safar Yadon Ka

निसंग-2 - जयश्री रॉय (Epi-63)


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एक स्त्री की सत्ता उसके पुरुष से बंधी है। पुरुष है तो उसका वजूद है। अगर परित्यक्ता है जीवन एक बोझ है, संत्रास है पीड़ा है। वह किसी की ज़रूरत नहीं, समाज के लिए उसका कोई वजूद नहीं। लेकिन अगर उसने अपने लिए मरूस्थल में एक बूंद की प्यास की भी इच्छा ज़ाहिर की तो वह पूरे समाज की जवाब देह है। कैसी विडम्बना है।  

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Safar Yadon KaBy Sushil Bharti