फैज़ एक इंकलाब के, आवाम की आवाज़ के नुमाइंदे व्यक्ति थे ,वो शायर तो थे ही पर उसके साथ साथ इंसानियत के हक़ में बोलने वाले , शोषितों के साथ कंधा मिलाकर चलने वाले इंसान भी थे ,उनकी हर नज़्म ,हर ग़ज़ल एक मैसेज देती है ,आज की नस्ल को भी ,उनको आज उनके जन्मदिन पर मेरी भेंट 🌹🌹