किसी को उसके पहनावे को देखकर उसका चरित्र और काम तय करना सही नहीं होता हैं क्योंकि दिखावे से भरी इस दुनिया में होता कुछ ओर है और चल कुछ ओर रहा होता हैं जया किशोरी जी ने मीडिया का उदाहरण देकर तथ्य को व्यक्त किया है आइए कुछ कहानियों के माध्यम से विस्तार से जानते हैं।