Poetry Podcast | Pankaj Upadhayay | Poet | Filmmaker | Euphony |

POETRY PODCAST E2 MEGH UNKNOWN


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POETRY PODCAST E2 MEGH UNKNOWN

POETRY PODCAST | MEGH |   Rendition by Pankaj Upadhayay   हम मेघ हमे जीवन प्यारा ,पर बरसा आग भी सकते है रस गीत न तुझको भाता हो ,प्रलय राग गा सकते है ।  हम उस दघीचि के बेटे हैं, संभव है तुझको याद नही जिसकी हड्डी से वज्र बना,मिलता ऐसा फौलाद कहीं ।  इस धरती पर हमने अब तक , प्यासा न किसी को लोटया यदि रण की तृष्णा लाएँ हो, तो बुझा उसे भी सकते है । हम मेघ •••••••••••••• हमसे लड़ने को काल चला, तो नभ निचोड गंगा लाएँ सागर गरजा तो बन अगस्तय ,उसके ज्वारो को पी आए। हम मेघ •••• भूचाल् हमारे पैरौ से, तूफान बंद है मुट्ठी में हम शंकर हैं प्रलयकंर हैं ताण्डव भी दिखला सकते है । हम मेघ •••••• मत समझ हमारे हिमगिरि की , कोई शीतलता हर लेगा नदियों का पानी पी लेगा भू की हरियाली हर लेगा । भीतर के ज्वालामुखीयो की, शायद तुझको पहचान नहीं हम उबल पड़े तो लावा से, टुण्ड्रा को भी दफना सकते हैं । हम मेघ हमें जीवन प्यारा ---------'--  If poetry interests you, do listen in  ..  2nd episode of my favorite childhood poems Poem - Megh Poet - Unknown  #PoetryPodcast https://youtu.be/fm9ILyk1K94

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