यद्यपि ऐसा प्रतीत होता है कि परमेश्वर मौन है तौभी हम उसकी उपस्थिति अनुभव करते हुए अपना जीवन व्यतीत करें। हम सकारात्मक और रचनात्मक ढ़ंग से सोचना सीखें। परमेश्वर को सुनने के लिए अपना कान खुला होना चाहिए।
यद्यपि ऐसा प्रतीत होता है कि परमेश्वर मौन है तौभी हम उसकी उपस्थिति अनुभव करते हुए अपना जीवन व्यतीत करें। हम सकारात्मक और रचनात्मक ढ़ंग से सोचना सीखें। परमेश्वर को सुनने के लिए अपना कान खुला होना चाहिए।