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प्रोफेसर रमेश गौतम रंगमंच के एक ऐसे विश्लेषक रहे जो साठ के दशक के अंतिम चरण से लेकर अब तक लगातार नाटकों का विवेचन -विश्लेषण करते रहे । प्रोफ़ेसर गौतम ने वर्तमान पीढ़ी में अनेक रंग चिंतकों को गढ़ा नाटक उनके ज़हन में ठीक वैसे बसा था जैसे भारतेंदु के ज़हन में नाटक के शिष्ट और लोकोन्मुख दोनों ही रूपों पर उनकी सामान पकड़ रही । रंगकर्म का मूलभूत गुण अनुशासन और ईमानदारी उनकी बहुमूल्य थाथी रहा ....
By Shoonya Theatre Groupप्रोफेसर रमेश गौतम रंगमंच के एक ऐसे विश्लेषक रहे जो साठ के दशक के अंतिम चरण से लेकर अब तक लगातार नाटकों का विवेचन -विश्लेषण करते रहे । प्रोफ़ेसर गौतम ने वर्तमान पीढ़ी में अनेक रंग चिंतकों को गढ़ा नाटक उनके ज़हन में ठीक वैसे बसा था जैसे भारतेंदु के ज़हन में नाटक के शिष्ट और लोकोन्मुख दोनों ही रूपों पर उनकी सामान पकड़ रही । रंगकर्म का मूलभूत गुण अनुशासन और ईमानदारी उनकी बहुमूल्य थाथी रहा ....