Vichar Bindu

रामधारी सिंह दिनकर की कविता समर शेष है | स्वर: राजा रवि


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ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो ,

किसने कहा, युद्ध की वेला चली गयी, शांति से बोलो?
किसने कहा, और मत वेधो ह्रदय वह्रि के शर से,
भरो भुवन का अंग कुंकुम से, कुसुम से, केसर से?

प्रस्तुति: विचारबिंदु

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