Radio Sur Sangam

Radio Sur Sangam

By Raaj GulatiMusicMusic Commentary
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Radio Sur Sangam episodes

  • नवशक्ति — दिन 9 · सिद्धिदात्री
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 9: माँ सिद्धिदात्री — पूर्णता — नौ दिन, और जो उनसे बनता है
    शिव को भी उन्हीं से मिला। कहा जाता है कि स्वयं शिव को आठों सिद्धियाँ सिद्धिदात्री से प्राप्त हुईं, और उसी क्षण से वे अर्धनारीश्वर कहलाए — आधा पुरुष, आधा स्त्री, एक ही शरीर में। देव भी उनके बिना पूर्ण नहीं थे। नौ दिन का पूरा कथन यहीं पूरा होता है।
    पूर्णता कोई दसवीं चीज़ नहीं है — वही नौ हैं, एक साथ। किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचिए जिसे आप पूर्ण कहते हैं: उसमें ज़मीन, टिकाव, केंद्रित साहस, कुछ रचने की इच्छा, कोमलता, न्याय, डर के साथ जीना, और गिरने के बाद की सफ़ाई — यही नौ हैं।
    और जो पूर्ण है वह बाँटता है: सिद्धिदात्री सिद्धि अपने पास नहीं रखतीं। पूर्णता जमा करने से नहीं आती।
    दसवाँ दिन विजयादशमी है — उसका नाम "अंत" नहीं, "विजय" है। और नवरात्रि हर वर्ष लौटती है: स्थिरता, साहस, करुणा एक बार पा लेने की चीज़ें नहीं हैं।
    स्वर — Lata Maheshwari (मन मंदिर सदा विराजो री, हे मात भवानी) · Priyanshi Jha (ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन) · Awatar Singh & Neeru Gulati (ओ, आएँ तेरे भवन, दे दे अपनी शरण) · Padmini Sharma & Neeru Gulati (भोर भई दिन चढ़ गया, मेरी अम्बे)
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    33 min
  • नवशक्ति — दिन 8 · महागौरी
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 8: माँ महागौरी — शुद्धता · करुणा — तूफ़ान के बाद की शांति
    शिव उन्हें श्याम वर्ण के कारण "काली" कहकर छेड़ते थे। उन्होंने तप किया, गंगा में स्नान किया, और उनका श्याम आवरण धुल गया — और वही त्यागा हुआ आवरण एक पृथक् देवी बनकर खड़ा हो गया: कौशिकी। फिर कौशिकी ने ही युद्ध में शुंभ और निशुंभ का वध किया। जिसे उन्होंने त्याग दिया, वही योद्धा बन गया।
    स्वर — Suyog Penkar (बहुत खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारी) · Suresh Luthra (रघुपति राघव राजा राम) · Rekha Chaurasia & Sonu Tiwari (अयोध्या मंगल-गान (श्री राम भजन))
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    39 min
  • नवशक्ति — दिन 7 · कालरात्रि
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 7: माँ कालरात्रि — निर्भयता — भय पर विजय · शुभंकरी
    रक्तबीज का वरदान: उसके रक्त की जो बूँद ज़मीन पर गिरे, उससे एक और रक्तबीज जन्म ले। अर्थात् उस पर प्रहार करना ही उसे बढ़ाना था — जीत का सीधा रास्ता था ही नहीं। इसलिए उन्होंने प्रहार करना छोड़ा और रक्त को ज़मीन पर गिरने से पहले पी लिया। यह दृश्य कोमल नहीं है, और परंपरा ने इसे कोमल बनाने की कोशिश भी नहीं की।
    और उसके बाद भी वे शुभंकरी कहलाईं। जिसने सबसे भयानक काम किया, उसी को सबसे शुभ नाम मिला।
    समकालीन अर्थ (दिन का केंद्र): कुछ डर लड़ने से बढ़ते हैं — यही उनका वरदान है। जो बात बदली नहीं जा सकती, जो कमी रहेगी, जो व्यक्ति लौटेगा नहीं — उनसे लड़ते रहिए तो वे बढ़ते हैं। उन्हें भीतर जगह दे दीजिए तो वे शांत हो जाते हैं। यह हार नहीं, सबसे कठिन जीत है।
    मीनू कपूर जी का जन्मदिन इसी दिन है — सबसे भयानक रूप के दिन, जिसका नाम शुभंकरी है।
    स्वर — Diwakar Jha (मित्तर प्यारे नु हाल मुरीदा दा कहना) · Meenu Kapoor (ओ पालनहारे) · Namita Mediratta (कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे) · Neeru Gulati (ओ मैया तेरी जगमग ज्योत उजारी)
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    34 min
  • नवशक्ति — दिन 6 · कात्यायनी
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 6: माँ कात्यायनी — संकल्प से न्याय तक — शक्ति का प्रयोग
    नाम किसी और का — लगातार दूसरा दिन। दिन 5 पर स्कन्दमाता का नाम उनके पुत्र का था; आज उनका नाम उनके (मानस) पिता का है। शक्ति अपना नाम लेकर नहीं आती — वह संबंध से नाम लेती है।
    सबसे बड़ी योद्धा का नाम उनकी जीत से नहीं बना। ऋषि कात्यायन ने तप में राज्य या सिद्धि नहीं माँगी — उन्होंने माँगा कि आदिशक्ति उनके घर बेटी बनकर आएँ। देवी आईं, और उन्होंने वह नाम स्वीकार कर लिया।
    विरोधाभास: जिन्होंने महिषासुर का वध किया, उन्हीं के पास वृंदावन की गोपियाँ अपना मनचाहा वर माँगने जाती हैं (कात्यायनी व्रत, भागवत दशम स्कंध)। न्याय और ममता दो अलग देवियाँ नहीं हैं — शक्ति का कठोर होना ज़रूरी नहीं, सही होना ज़रूरी है।
    न्याय अकेले का काम नहीं: देवता अलग-अलग लड़े और हारे। परंपरा कहती है कि जो शक्ति प्रकट हुई वह सबके तेज से बनी — न्याय जुड़ने से बनता है।
    आज का सार: चुप रहना भी एक फ़ैसला है। वह तटस्थता नहीं — वह हमेशा किसी एक पक्ष की मदद करता है।
    स्वर — Bhanumathi Sharma (महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र (ऐगिरि नंदिनी)) · Reba Gupta (संसार से भागे फिरते हो) · Sudha Dave (बेख़ौफ़ आज़ाद है रहना मुझे) · Ashok Deshpande (वो सुबह कभी तो आएगी)
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    35 min
  • नवशक्ति — दिन 5 · स्कन्दमाता
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 5: माँ स्कन्दमाता — वात्सल्य · मातृशक्ति — जो थामता नहीं, जाने देता है
    अस्त्र का नाम ही शक्ति था। माँ ने छह वर्ष के कार्तिकेय के हाथ में जो दिव्य भाला रखा, उसका नाम "शक्ति" है। नौ दिन का यह कार्यक्रम नवशक्ति कहलाता है — और नाम यहीं से आता है: एक माँ के हाथ से। (स्रोत: सुशीला जी का पाठ।)
    तारकासुर के वरदान का अर्थ: उसकी मृत्यु केवल शिव के पुत्र के हाथों हो सकती थी — और उस समय शिव का कोई पुत्र नहीं था। अर्थात् तीनों लोकों की रक्षा किसी अस्त्र या युद्ध-नीति पर नहीं, इस बात पर टिकी थी कि एक बालक जन्मे और कोई उसे पाले। वात्सल्य योजना का कोमल हिस्सा नहीं था — वही पूरी योजना थी।
    वात्सल्य की कठिन परिभाषा: माँ अपने छह वर्ष के बेटे के आगे ढाल बनकर खड़ी नहीं हुईं। उन्होंने उसे अस्त्र दिया और हट गईं। प्रेम का सबसे कठिन हिस्सा बचाना नहीं, जाने देना है।
    वरदान माँ को नहीं मिलता: परंपरा कहती है कि स्कन्दमाता की उपासना में फल गोद में बैठे बालक को मिलता है — माँ के हाथ से। आशीर्वाद उन तक नहीं, उनके through जाता है।
    या देवी का पाठ-भेद: सुशीला जी "लक्ष्मीरूपेण संस्थिता" से आरंभ करती हैं, जबकि कार्यक्रम प्रतिदिन "शक्तिरूपेण" कहता है। दोनों एक ही स्तुति के पाठ हैं — मंगलाचरण में यही पुल बनाया गया।
    स्वर — Debashish Nandy (कान्हा बोले ना) · Indrani Borpujari (मैं तुलसी तेरे आंगन की) · Raksha (सुरमई अँखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे) · Sushila Suresh Katneshwarkar (स्कन्दमाता की कथा — मराठी में (आजीचा आशीर्वाद))
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    29 min
  • नवशक्ति — दिन 4 · कूष्माण्डा
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 4: माँ कूष्माण्डा — सृजन एवं प्रकाश — शून्य से आरंभ
    ध्यान-पंक्ति का चौंकाने वाला चित्र: जिन्होंने मुस्कान से सृष्टि रची, उनके दोनों हाथों में कलश हैं — एक सुरा का, दूसरा रुधिर से भरा। सृजन करने वाले हाथ कोमल ही नहीं हैं।
    यही दिन 4 का असली विचार: सृजन का अर्थ केवल सुंदरता नहीं। जो रचता है, वह उसकी कीमत भी जानता है। रचना मुफ़्त नहीं मिलती — और फिर भी वे "शुभदा" कहलाती हैं, कल्याण देने वाली।
    परंपरा कहती है कि जब कुछ नहीं था — न प्रकाश, न आकार, केवल अंधकार — तब उन्होंने हँसकर ब्रह्मांड रचा। किसी अस्त्र से नहीं, किसी तप से नहीं। और परंपरा उन्हें सूर्य के भीतर रखती है — नौ रूपों में केवल उन्हें।
    नाम का विरोधाभास (शब्द-विचार देखें): ब्रह्मांड रचने वाली देवी का नाम एक कद्दू के नाम पर है। सृष्टि का आरंभ भव्य नहीं, साधारण और छोटा था।
    दिन 3 से जोड़: वहाँ शक्ति को केंद्र चाहिए था। आज वह केंद्र पहली बार कुछ रचता है।
    कूष्माण्ड-बलि का असली अर्थ: शाक्त परंपरा में बलि कभी पशु-बलि भी रही, और उसी परंपरा ने उसकी जगह पेठा रख दिया — कद्दू काटा जाता है और वही बलि मान ली जाती है। यह सीधे रुधिर-कलश से जुड़ता है: कीमत को स्वीकार करना, पर किसी का जीवन लिए बिना। और जिस फल से यह किया जाता है, उसी के नाम पर देवी का नाम है।
    शुभदा — शुभ + दा। "शुभा" (जो स्वयं शुभ है) नहीं, "शुभदा" (जो शुभ देती है)। और शुभ का अर्थ "आसान" या "बिना कष्ट" नहीं — "जो अंत में अच्छा निकले"। इसलिए वे यह नहीं कहतीं कि कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी; वे यह कहती हैं कि चुकाया हुआ व्यर्थ नहीं जाएगा।
    सुधार-नोट: गोपियों का व्रत कात्यायनी व्रत है (दिन 6), कूष्माण्ड-बलि नहीं। दोनों को न मिलाएँ।
    स्वर — B.Balasubrahmanyam (ये कौन चित्रकार है) · Jayesh (दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई) · Neeru Gulati (ज्योति कलश छलके)
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    31 min
  • नवशक्ति — दिन 3 · चन्द्रघण्टा
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 3: माँ चन्द्रघण्टा — साहस • संयमित शक्ति • एकाग्रता
    ध्वनि भी शक्ति है। दुर्गासप्तशती के एकादश अध्याय में घण्टे की स्तुति है: उसका स्वन जगत को भर देता है और असुरों का तेज नष्ट करता है। रक्षा प्रहार से नहीं, नाद से। अस्त्र एक लक्ष्य को छूता है; नाद पूरे वातावरण को बदल देता है।
    इसलिए: साहस हमेशा किसी पर प्रहार करना नहीं है। कभी अपनी उपस्थिति इतनी स्पष्ट कर देना भी साहस है कि भय की दिशा बदल जाए।
    नाम का विरोधाभास: चन्द्र — शीतलता; घण्टा — चेतावनी का नाद। एक ही मस्तक पर शांति और युद्ध-सज्जता, दोनों।
    तीन परतें: साहस (पीछे न हटना) · एकाग्रता (शक्ति को बिखरने न देना) · संयम (शक्ति का विवेकपूर्ण उपयोग)।
    हटाया गया: "मस्तक का अर्धचन्द्र शिव का है, विवाह के बाद पार्वती ने धारण किया" — भक्ति-परंपरा में प्रचलित, पर सप्तशती/पुराण से anchor नहीं। प्रसारण-तथ्य के रूप में प्रयोग न करें।
    Radio Sur Sangam व्याख्या (शास्त्र-वचन नहीं): शक्ति केवल गति हो तो भटक सकती है; केंद्र निष्क्रिय हो तो ऊर्जा जीवन नहीं रचती। मणिपूर-अग्नि का रूपक — चूल्हे की आग पकाती है, जंगल की आग ले जाती है; अंतर आग में नहीं, उसके बँधे होने में।
    स्वर — Meenu Kapoor (इतनी शक्ति हमें देना दाता) · Purvi Vyas (शिव ताण्डव स्तोत्र) · Shailja Hota (मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा)
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    36 min
  • नवशक्ति — दिन 2 · ब्रह्मचारिणी
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। दिन 2: माँ ब्रह्मचारिणी — तपस्या · संयम · संकल्प — जो छोड़ा जाए, वह खोया नहीं जाता
    अपर्णा नाम की कथा: शिव को पाने के लिए तप — पहले हज़ार वर्ष केवल फल-फूल, फिर सौ वर्ष शाक, फिर तीन हज़ार वर्ष केवल सूखे बिल्वपत्र। और फिर पत्ते भी छोड़ दिए — अ-पर्णा, “पत्तों के बिना”।
    कथा का सार यह नहीं कि उन्होंने क्या खाया या नहीं खाया। सार यह है कि उनका लक्ष्य परिस्थितियों और सुविधा पर निर्भर नहीं था — शिवपुराण के अनुसार उन्होंने गर्मी, ठंड और वर्षा समभाव से सहीं, और मन शिव में स्थिर रखा।
    तप और यातना का अंतर: यातना हम पर आती है, तप हम चुनते हैं। तप = तपाना, जैसे सोना आग में।
    संकल्प का अर्थ कठोर होना नहीं; अपने चुने हुए सत्य से बार-बार न हटना है।
    स्वर — Sumit Kumar Banerjee (वर दे, वीणावादिनि वर दे) · Ramchandra Kulkarni (मन तड़पत हरि दर्शन को आज) · Anand Renapure (जीवन से न हार ओ जीने वाले)
    प्रत्येक गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों।
    ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY
    आवाज़ — आदित्य एवं मीरा · संयोजन — नीरू जी · तकनीकी व्यवस्था — प्रेरणा अंचन
    28 min
  • नवशक्ति — दिन 1 · शैलपुत्री
    नवशक्ति — नौ दिन, नौ शक्तियाँ। पहला दिन: माँ शैलपुत्री — स्थिरता, भीतर का आधार। नौ नामों का स्रोत देवीकवच है, और शैलपुत्री स्वयं सती हैं — पुनर्जन्म में; नवरात्रि का पहला दिन उस देवी का है जिन्हें फिर से शुरू करना पड़ा। पाँच स्वर — प्रेरणा अंचन (गणपति वंदना), भानुमती शर्मा (ऐ मालिक तेरे बंदे हम), नम्रता प्रहराज (उंगली पकड़ के तूने चलना सिखाया), और नीरू गुलाटी एवं बिश्वजीत जी का युगल (मधुबन खुशबू देता है)। हर गायक ने अपना गीत स्वयं चुना — और बताया, क्यों। ONE SONG • ONE SHAKTI • ONE WHY। प्रस्तुति — AI RJ आदित्य और मीरा। प्रसारण 11 अक्टूबर 2026, प्रातः 7:30 और सायं 7:30।
    30 min
  • नवरस दरबार 2026 — राज्याभिषेक · The Coronation (King & Cabinet)
    Radio Sur Sangam presents the Coronation of Navras Darbar 2026 — the King & Cabinet results. नौ रसों के नौ नवरस रत्न — श्रृंगार: Shuba Subramanian (Mumbai), हास्य: Bhanumathi Sharma (Mumbai), करुण: Dr Raju Dhir (Chandigarh), रौद्र: B. Balasubrahmanyam (Mumbai), वीर: Raksha H S (Bengaluru), भयानक: Namrata Praharaj (Bhubaneswar), बीभत्स: Jitendra Malviya (Prayagraj), अद्भुत: Shivani Gupta (Noida), शांत: Soma Roy (Agartala)। चार विशेष सम्मान — नवरस समकक्ष सम्मान: Nandinii Roy (Midnapore), नवरस द्विरस सम्मान: Rekha Chaurasia (Mirzapur), नवरस स्वर-गौरव सम्मान: Neeraj Verma (Jalandhar), नवरस सत्यनिष्ठा सम्मान: Anand Renapure (Pune)। नवरस साम्राज्ञी 2026 — Meenu Kapoor (Chandigarh)। हर विजेता का गीत पूरा सुनाया गया। प्रस्तुति — AI RJ आदित्य और मीरा। सुपर जूरी — पुष्पिंदर सिंह, नमिता मेदिरत्ता। प्रसारण 3 सितंबर 2026।
    2 hr 5 min

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