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"क्या मिल पाएंगे इन प्रश्नों के उत्तर हार कर खुद से कैसे जी लेते हो? अपने आंसू खुद ही कैसे पी लेते हो। मुझे नहीं आता इस अकेले पन से। अब लड़ना जब लगे सब बेगाने तो क्यों न हो सब आगे बढ़ना कुछ ऐसे फैसले हैं जो बस औरों के साथ के लिए ही किए। जब वो लोग ही न समझे तो क्यों ही ये जिंदगी, ऐसे जिए क्या मिल पाएगी मुझे अब ऐसी कोई चिंगारी जिससे लग जाएं आग मन में और जीत लो। दुनिया सारी क्या मैं चमकूंगा कभी सूरज जैसे इन छोटे मोटे मुद्दों से कैसे बढूं आगे क्या मैं? अब धन्य हो पाऊँगा?"