लॉक डाउन की घोषणा के बाद, हमें एहसास हुआ कि प्रवासी मज़दूर जो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा हैं, हम उन्हें उपेक्षा दृष्टि से देखतें हैं | पहली बार हमने इन ‘ऋतुकालीन शरणार्थियों’ के दर्द को महसूस किया | इनका हमारी श...
लॉक डाउन की घोषणा के बाद, हमें एहसास हुआ कि प्रवासी मज़दूर जो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा हैं, हम उन्हें उपेक्षा दृष्टि से देखतें हैं | पहली बार हमने इन ‘ऋतुकालीन शरणार्थियों’ के दर्द को महसूस किया | इनका हमारी श...