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भूखे भजन न होय गोपाला
ले लो अपनी कंठी माला...
यह पुरानी कहावत आपने भी जरूर सुनी होगी। मतलब बहुत सीधा सा है। पेट जब भूखा हो, तब भगवान के भजन में भी ध्यान नहीं लगता... इंसान के विकास का इतिहास जितना पुराना है, भूख और भोजन का रिश्ता भी उतना ही पुराना है । है न!
हेलो दोस्तों, ग्रेमैटर्स पॉडकास्ट में आपका स्वागत है।
आज रविवार है, 12 जून। आज डब्ल्यूटीओ यानी विश्व व्यापार संगठन के 164 सदस्य देशों के व्यापार मंत्री चार साल बाद 12वें मंत्री स्तरीय सम्मेलन (MC12) के लिए जेनेवा में मिल रहे हैं। ये मंत्रीगण दुनिया भर में चिंता का सबब बन रहे कुछ नये-पुराने मुद्दों का समाधान तलाशने का प्रयास करेंगे। इनमें जिन दो मुद्दों पर सर्वाधिक चर्चा होगी, वे हैं कई विकासशील देशों में बढ़ती खाद्य असुरक्षा और कोरोना से सुरक्षा के लिए टीकों की अपर्याप्त आपूर्ति।
लेकिन, इस पॉडकास्ट की शुरुआत से आप समझ गये होंगे, कि हम आज भूख और भोजन यानी खाद्य असुरक्षा पर चर्चा करेंगे।
आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि संयुक्त राष्ट्र की संस्था द्वारा इसी साल जारी Food Waste Index Report 2021 के मुताबिक दुनिया में वर्ष 2019 में 93 करोड़ 10 लाख टन भोजन बर्बाद हो गया था! जी हां, 93 करोड़ 10 लाख टन! और यह कुल वैश्विक खाद्य उत्पादन का 17 फीसदी है। इनमें सबसे ज्यादा 61 फीसदी भोजन घरों से बर्बाद हुआ। फूड सर्विस प्रोवाइडर यानी होटल, रेस्टोरेंट आदि से 26 फीसदी खाना बर्बाद हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में भारत के घरों में बर्बाद हुए भोजन की मात्रा 6 करोड़ 87 लाख टन थी।
यह स्थिति तब है, जबकि उसी वर्ष दुनियाभर में 69 करोड़ से अधिक, जबकि भारत में करीब 20 करोड़ लोगों को एक शाम ही भरपेट भोजन मिल पाया। दुनिया में भूखे सोने वालों की संख्या वर्ष 2030 तक 84 करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है!
कितनी अजीब विडंबना है न! एक तरफ करोड़ों टन भोजन बर्बाद हो रहा है और दूसरी तरफ करोड़ों लोग भूखे सो रहे हैं। इस पर, हर उस व्यक्ति को जरूर गौर करना चाहिए, जो किसी भोज में, होटल में या अपने घर में भूख से ज्यादा खाना लेकर उसे बर्बाद कर देते हैं।
खाने से भरे हुए प्लेट को डस्टबिन में फेंकने से पहले यह जरूर याद रखिएगा कि लाखों लोग ऐसे हैं, जिनके नसीब में भूख तो है पर भरपेट भोजन नहीं। जितना खाना आपने एक प्लेट में फेंका है, महज़ उतने ही खाने की कमी से कोई आज भूखा तड़प रहा होगा।
भोजन की कीमत भूख से तड़पते लोगों की नजर से आंकने का प्रयास करिए।
एक बार सोच कर देखिए,
भूख को महसूस करके देखिए,
भोजन जीवन का आधार है, इसे कचरे में मत फेंकिए।
Respect for food is respect for life
आइए एक संकल्प करें, इस संदेश को तीन और लोगों तक पहुंचाएं।
सोशल मीडिया और whatsapp पर जोक्स और अन्य मेसेजेस् के साथ इस संदेश को भी फैलाएं ।
यह थी GreyMatters Communications की तरफ से एक छोटी सी अपील।
By GreyMatters Communicationsभूखे भजन न होय गोपाला
ले लो अपनी कंठी माला...
यह पुरानी कहावत आपने भी जरूर सुनी होगी। मतलब बहुत सीधा सा है। पेट जब भूखा हो, तब भगवान के भजन में भी ध्यान नहीं लगता... इंसान के विकास का इतिहास जितना पुराना है, भूख और भोजन का रिश्ता भी उतना ही पुराना है । है न!
हेलो दोस्तों, ग्रेमैटर्स पॉडकास्ट में आपका स्वागत है।
आज रविवार है, 12 जून। आज डब्ल्यूटीओ यानी विश्व व्यापार संगठन के 164 सदस्य देशों के व्यापार मंत्री चार साल बाद 12वें मंत्री स्तरीय सम्मेलन (MC12) के लिए जेनेवा में मिल रहे हैं। ये मंत्रीगण दुनिया भर में चिंता का सबब बन रहे कुछ नये-पुराने मुद्दों का समाधान तलाशने का प्रयास करेंगे। इनमें जिन दो मुद्दों पर सर्वाधिक चर्चा होगी, वे हैं कई विकासशील देशों में बढ़ती खाद्य असुरक्षा और कोरोना से सुरक्षा के लिए टीकों की अपर्याप्त आपूर्ति।
लेकिन, इस पॉडकास्ट की शुरुआत से आप समझ गये होंगे, कि हम आज भूख और भोजन यानी खाद्य असुरक्षा पर चर्चा करेंगे।
आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि संयुक्त राष्ट्र की संस्था द्वारा इसी साल जारी Food Waste Index Report 2021 के मुताबिक दुनिया में वर्ष 2019 में 93 करोड़ 10 लाख टन भोजन बर्बाद हो गया था! जी हां, 93 करोड़ 10 लाख टन! और यह कुल वैश्विक खाद्य उत्पादन का 17 फीसदी है। इनमें सबसे ज्यादा 61 फीसदी भोजन घरों से बर्बाद हुआ। फूड सर्विस प्रोवाइडर यानी होटल, रेस्टोरेंट आदि से 26 फीसदी खाना बर्बाद हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में भारत के घरों में बर्बाद हुए भोजन की मात्रा 6 करोड़ 87 लाख टन थी।
यह स्थिति तब है, जबकि उसी वर्ष दुनियाभर में 69 करोड़ से अधिक, जबकि भारत में करीब 20 करोड़ लोगों को एक शाम ही भरपेट भोजन मिल पाया। दुनिया में भूखे सोने वालों की संख्या वर्ष 2030 तक 84 करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है!
कितनी अजीब विडंबना है न! एक तरफ करोड़ों टन भोजन बर्बाद हो रहा है और दूसरी तरफ करोड़ों लोग भूखे सो रहे हैं। इस पर, हर उस व्यक्ति को जरूर गौर करना चाहिए, जो किसी भोज में, होटल में या अपने घर में भूख से ज्यादा खाना लेकर उसे बर्बाद कर देते हैं।
खाने से भरे हुए प्लेट को डस्टबिन में फेंकने से पहले यह जरूर याद रखिएगा कि लाखों लोग ऐसे हैं, जिनके नसीब में भूख तो है पर भरपेट भोजन नहीं। जितना खाना आपने एक प्लेट में फेंका है, महज़ उतने ही खाने की कमी से कोई आज भूखा तड़प रहा होगा।
भोजन की कीमत भूख से तड़पते लोगों की नजर से आंकने का प्रयास करिए।
एक बार सोच कर देखिए,
भूख को महसूस करके देखिए,
भोजन जीवन का आधार है, इसे कचरे में मत फेंकिए।
Respect for food is respect for life
आइए एक संकल्प करें, इस संदेश को तीन और लोगों तक पहुंचाएं।
सोशल मीडिया और whatsapp पर जोक्स और अन्य मेसेजेस् के साथ इस संदेश को भी फैलाएं ।
यह थी GreyMatters Communications की तरफ से एक छोटी सी अपील।