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"मैं 1 टीचिंग बैकग्राउंड से हूँ तो मेरा जो पहला जॉब है वो 1 असिस्टेंट टीचर के तौर पर मैंने ज्वाइन किया था फर्स्ट डेड के अंदर ऐक्चवली मेरा जो स्कूलिंग है कॉलेज है हिंदी मीडियम से हुआ है लेकिन जिद थी कि इंग्लिश मिडियम स्कूल में ही जॉब करना है तो 1 महीना पहले मैं इंटरव्यू देकर आई थी और जो कॉन्सेप्ट से मुझे पूछे गए वो सारे मैंने हिंदी में बखूबी बयां भी किए मैं सलेक्ट भी हो गई क्योंकि वो इंग्लिश मीडियम स्कूल था तो प्रिंसिपल मैम ने मुझे यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि आपके कांसेप्ट क्लियर है नाम बट यहाँ आपको पढ़ाना इंग्लिश मीडियम में है और आपका इंग्लिश जो है वो बहुत वीक है तो सौरी हम आपको अपॉइंट नहीं कर पाएंगे और बिना किसी तैयारी के बस मैंने यूं ही प्रिंसिपल मैम को चैलेंज कर दिया था कि मैं 1 महीने के बाद आप मुझे फिर से वापस बुलाएंगे और इसी जॉब पे आप मुझे रखेंगे मुझे बस 1 महीने का टाइम दीजिए मैं अपना इंग्लिश इतना इम्प्रूव कर लूंगी कि एटलीस्ट उस इंटरव्यू को इंग्लिश में फेस कर सकूँ और बच्चों को पढ़ा सकूँ और बस मैं चली आई थी और वही हुआ मैंने तो यूं ही कह दिया था बस प्रिंसिपल मैम को उस वक्त यह सोचा नहीं था कि सच में 1 महीने के बाद मुझे उसी स्कूल से प्रिंसिपल मैम का फिर से कॉल आएगा और उनको अर्जेंसी थी कि उनकी असिस्टेंट टीचर थी फर्स्ट टेंडर के अंदर वो सडनली बिना किसी इंटरमिशन के जॉब छोड़ के चली गई थी तो उनको अर्जेंट रिक्वायरमेंट थी 1 असिस्टेंट की गई प्रिंसिपल मैम के पास और मैंने इंटरव्यू दिया अपना हाँ मेरी इंग्लिश इतनी इम्प्रूव तो नहीं हो पाई थी बट हैं पहले से बहुत ज्यादा बेहतर थी और फाइनली 2 महीने ट्रायल बेस पे रखने के लिए कहा और हम आपको ऑब्जर्व करेंगे अगर आप अपना काम बखूबी कर पाते हैं तो कंटिन्यू करेंगे और इस तरह से मुझे अपना फर्स्ट जॉब हिंदी मीडियम की कूलिंग और कॉलेजिंग होने के बावजूद 1 इंग्लिश मीडियम में मिला था जो एज एन असिस्टेंट टीचर मैंने फर्स्ट टैंडर्ड के अंदर ज्वाइन किया था उस वक्त मेरी क्लास में 40 बच्चे हुआ करते थे अकॉर्डिंग टू सी बी एस सी रूल 1 ही क्लास में 20 से बच्चे ज्यादा नहीं होने चाहिए बट उस क्लास में 40 बच्चे थे और इसी वजह से 1 असिस्टेंट टीचर की अर्जेंट रिक्वायरमेंट थे उनको और इस तरह से मैंने अपना फर्स्ट जॉब जो है वो उसे स्कूल में ज्वाइन किया था और उसके बाद बस स्कूल के साथ मेरी सिर्फ और सिर्फ अच्छी यादें बनती चली गई कारवा बनता चला गया लोग जुड़ते चले गए मैं डे बाई डे इम्प्रूव करती चली गई और कोशिश मेरी जो है वो आज भी जारी क्योंकि बिंग एज टीचर मैं जानती हूँ कि लर्निंग नेवर एंड्स थैंक यू।"