Taabeer

Saying bye to 2020 - Shayari


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गुजरते साल ने याद दिलाएं है,  कुछ दस्तूर

कुछ भी मुस्तक़िल नहीं,

ना होना तुम मगरूर

यह जिंदगी खुदा की रहमत है ,

न जाना तुम यह भूल

वक़्त दो वक़्त की बात है

खुशियों के खिला तू फूल

गुजरते साल ने याद दिलाएं है,  कुछ दस्तूर

कुछ भी मुस्तक़िल नहीं,

ना होना तुम मगरूर

क्या मक़सद है तेरा इस दुनिया में

जो है तेरा वजूद

रुक jara sa sooch jara sa

यह तक़लीफ़ें क्यों है मौजूद

गुजरते साल ने याद दिलाएं है,  कुछ दस्तूर

कुछ भी मुस्तक़िल नहीं,

ना होना तुम मगरूर

रिश्ते नाते और धन दौलत

सब यहीं जाने है छूट

अपनी हकीकत को जान

और छोड़ दे यह लूट

गुजरते साल ने याद दिलाएं है,  कुछ दस्तूर

कुछ भी मुस्तक़िल नहीं,

ना होना तुम मगरूर

दिल में बस मोहबत हो

तiड़ दे यह ग़ुरूर

उम्मीदों के दिए रोशन हो

कर औरों के गम दूर

गुजरते साल ने याद दिलाएं है,  कुछ दस्तूर

कुछ भी मुस्तक़िल नहीं,

ना होना तुम मगरूर

अपने हर कर्म का

हिसाब रखना तुम जरूर

पहचान ले खुदा का

जो तुजमे है नूर

गुजरते साल ने याद दिलाएं है,  कुछ दस्तूर

कुछ भी मुस्तक़िल नहीं,

ना होना तुम मगरूर

Thanks For listening.

Sangeeta Sharma

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