
Sign up to save your podcasts
Or


फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना।तरु की झकी डाुलियों से नित, सीखो शीश झकाुना।सीख हवा के झोंकों से लो, कोमल भाव बहाना।दध तथा पाूनी से सीखो, मिलना और मिलाना।सरज कीूकिरणों से सीखो, जगना और जगाना।लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना।दीपक से सीखो जितना, हो सके अँधेरा हरना।पथृ्वी से सीखो प्राणी की, सच्ची सेवा करना।जलधारा से सीखो आगे, जीवन-पथ में बढ़ना।और धएँ से सीखो हरदम, ऊ ुँचे ही पर चढ़ना। श्रीनाथ सिंह
By Dr. Kritika Mathurफूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना।तरु की झकी डाुलियों से नित, सीखो शीश झकाुना।सीख हवा के झोंकों से लो, कोमल भाव बहाना।दध तथा पाूनी से सीखो, मिलना और मिलाना।सरज कीूकिरणों से सीखो, जगना और जगाना।लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना।दीपक से सीखो जितना, हो सके अँधेरा हरना।पथृ्वी से सीखो प्राणी की, सच्ची सेवा करना।जलधारा से सीखो आगे, जीवन-पथ में बढ़ना।और धएँ से सीखो हरदम, ऊ ुँचे ही पर चढ़ना। श्रीनाथ सिंह

1,264 Listeners

2 Listeners