प्रस्तुत है "शाम-ए-शायरी" के चौथे भाग की तीसरी और अंतिम कड़ी जहाँ गहराती रात में शायरी का सुरूर भी अपने पूरे शबाब पर है और उसे पूरी शिद्दत से आप तक पहुँचा रहे हैं अपने 'ख्याल' के लिए ख्यात मनुज मेहता |
प्रस्तुत है "शाम-ए-शायरी" के चौथे भाग की तीसरी और अंतिम कड़ी जहाँ गहराती रात में शायरी का सुरूर भी अपने पूरे शबाब पर है और उसे पूरी शिद्दत से आप तक पहुँचा रहे हैं अपने 'ख्याल' के लिए ख्यात मनुज मेहता |