This poem is written by rizwan khan sultan alig
Here’s an episode that will keep you waiting for the next one. Tune in जिंदगी मुस्कुराती रही रात भर
शम्मा फिर झिलमिलाती रही रात भर
ले के बारिश कोई मौसिकी की सदा
धुन नई गुनगुनाती रही रात भर
एक हसीन शोख ने कल सताया बहुत
वो मुझे आजमाती रही रात भर!