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प्रेम की कोई भाषा नहीं, यह एक निज भाव है, बस जिससे होता है टूटकर होता। प्रेम की भाषा इंसान, पशु, पक्षी, वन्य जीव जन्तु सब समझते है और यह एक ऐसा सूत्र है जिससे कोई भी अनायास ही जन्म जन्मांतर के लिए बांध जाता है।
By Sushil Bhartiप्रेम की कोई भाषा नहीं, यह एक निज भाव है, बस जिससे होता है टूटकर होता। प्रेम की भाषा इंसान, पशु, पक्षी, वन्य जीव जन्तु सब समझते है और यह एक ऐसा सूत्र है जिससे कोई भी अनायास ही जन्म जन्मांतर के लिए बांध जाता है।