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Genesis 12:1-3 (HIN) यहोवा ने अब्राम से कहा,* “अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊँगा। (प्रेरि 7:3,इब्रा 11:8)
और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊँगा, और तुझे आशीष दूँगा, और तेरा नाम महान करूँगा, और तू आशीष का मूल होगा।
और जो तुझे आशीर्वाद दे, उन्हें मैं आशीष दूँगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूँगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएँगे।” (प्रेरि 3:25,गला 3:8)
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Ephesians 5:22-33 (HIN) हे पत्नियों, अपने-अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के। (कुलु. 3:18, 1 पत. 3:1, उत्प. 3:16)
क्योंकि पति तो पत्नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है।
पर जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्नियाँ भी हर बात में अपने-अपने पति के अधीन रहें।
हे पतियों, अपनी-अपनी पत्नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया,
कि उसको वचन के द्वारा जल के स्नान* से शुद्ध करके पवित्र बनाए,
और उसे एक ऐसी तेजस्वी कलीसिया बनाकर अपने पास खड़ी करे, जिसमें न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्तु हो, वरन् पवित्र और निर्दोष हो।
इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी-अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे, जो अपनी पत्नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है।
क्योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन् उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है।
इसलिए कि हम उसकी देह के अंग हैं।
“इस कारण पुरुष माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।” (उत्प. 2:24)
यह भेद तो बड़ा है; पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूँ।
पर तुम में से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्नी भी अपने पति का भय माने।
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प्रभु हमें समर्थ देता है कि हम दुष्ट आत्माओं को निकाले बीमारी को चंगा करें यह हमारे लिए बड़ी आशीष है उसने हमें राज्य करने के लिए बुलाया है ना की हम शैतान के हाथों के नीचे रहे
जब परमेश्वर ने इसराइलियों को मिश्र से मिस आजाद किया और कनान नाम देश में लेकर जा रहा था तो वहां पर कैसे रहना है कैसे जीना है क्या करना है क्या खाना है सब कुछ के बारे में व्यवस्था दी और उसने कहा की वे लोग अपने बच्चों को भी बलि कर देते हैं तंत्र-मंत्र जादू टोना ओझाओं के पास जाना यह उनका जीवन था तुम यह कामना करना तुम उनको जिंदा ना छोड़ना निकाल देना। तुम्हे उनको सहन नहीं करना है
मसीह में सेवा का जीवन हमारे जीवन में बाकी सारी आशीष का कारण है अगर हमें लम्बी आयु स्वस्थ जीवन फाइनेंशली आशीष परिवार में शांति कुछ भी चाहिए उसका आधार है परमेश्वर की व्यवस्था और उसमें जीना। पुराने नियम मे राजाओं को परमेश्वर की की व्यवस्था जीवन भर पढ़ना होता था जिससे कि वह लंबे समय तक शान करवा उनके अंदर घमंड ना आए इस स्वार्थी ना हो और अपने देश के लिए आशीष का कारण हो
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