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May 07, 2020सिंहासन खाली करो कि जनता आती है | कविता - रामधारी सिंह "दिनकर" | स्वर : राजा रवि2 minutesPlayसदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।...moreShareView all episodesBy Vichar BinduMay 07, 2020सिंहासन खाली करो कि जनता आती है | कविता - रामधारी सिंह "दिनकर" | स्वर : राजा रवि2 minutesPlayसदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।...more
सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।
May 07, 2020सिंहासन खाली करो कि जनता आती है | कविता - रामधारी सिंह "दिनकर" | स्वर : राजा रवि2 minutesPlayसदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।...more
सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।