🙏🏼 जय जिनेन्द्र🙏🏼
तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम हैदराबाद द्वारा प्रसारित "कथा रत्नमाला" की अगली कड़ी में आज हम जानेंगे कैसे संशयशील व्यक्ति अपना अहित कर लेता है और यह भी जानेंगे कि दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल है पर स्वयं के लिए आचरण करना कठिन।
आशा है कि हमारा यह प्रयास आपके आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण में सहभागी बनेगा।
इसी विश्वास के साथ प्रस्तुत है आज की कथा "संशयात्मा विनश्यति"