संतोष अमुल्य है
वैसे ही जैसे पानी
जैसे बहती हवा
सूर्य की तपिश
ये सर्वोच्च संपत्ति
सर्वश्रेष्ठ संपदा
एक गरीब
एक अमीर से
ज्यादा प्रसन्न
संतुष्ट और स्वस्थ होगा
क्योंकि गरीबी अभिशाप तो है
किन्तु वो गरीब राजा है जो
अपने तय संसाधन मे संतुष्ट है
कर्म अनवरत कर रहा
दोषो से दूर है
ईश्वर को सर्वस्व समर्पित कर दिया हो जिसने!