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संयमित मन परम मित्र है असंयमित मन सबसे बड़ा शत्रु ( Audio Podcast )


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संयमित मन परम मित्र है असंयमित मन सबसे बड़ा शत्रु
एक संयमित मन हमारा सबसे बड़ा इसी तरह एक असंयमित मन हमारा सबसे भयंकर शत्रु हो सकता है। विचार ही हैं, जो हमें खुशी प्रदान करते हैं। इसी तरह विचार ही हैं, जो हमें निराशा के समंदर में फेंक सकते हैं। जब हम अपने घर को साफ रखना पसंद करते हैं, तो क्यों नहीं हम अपने मन को भी उतना ही साफ और चमकदार बनाए रखें।
| हमारे विचार बीज हैं, कर्म वृक्ष हैं | मन को कैसे जीतें
हम अपने जीवन में जो कर्म करते हैं। वे उन विचारों के परिणाम होते हैं, जो हमारे मन में आते हैं। यानी कहा जा सकता है कि हमारे विचार एक बीज हैं और हमारे कर्म उनके वृक्ष। अगर बीज ही बुरा होगा तो उसका वृक्ष भी उतना ही बुरा होगा। इसलिए अगर आप अच्छे कर्म करना चाहते हैं तो आपको अच्छे बीजों यानी अच्छे विचारों की जरूरत होगी। अगर आप अपने काम को सबसे बेहतर बनाना चाहते हैं तो आपको अपने विचारों को उतना ही बेहतर बनाने की जरूरत होगी। अगर हम इसे बेहतर नहीं बनाएंगे तो प्रकृति ऐसी स्थितियों को जन्म देगी
जो हम आज हैं, वैसे कल नहीं होंगे। इसी तरह हमारे विचार भी हमेशा स्थायी नहीं हो सकते। मन एक कच्ची मिट्टी की तरह है। जिसे आप अपनी इच्छाशक्ति से कोई भी आकार दे सकते हैं। आपका मन बार-बार भटकेगा, क्योंकि वह माया से बना है, लेकिन बार-बार अभ्यास करने से वह एक जगह स्थिर होने हीं
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