इस भागदौड़ भरी जिंदगी में मानव जैसे अकेले रह गया है, और हो भी क्यों ना? क्योंकि अब उसने एकल परिवार में रहने की आदत जो बना ली है। वहीं इससे इतर संयुक्त परिवार, जिसमें मां-बाप और बच्चों के साथ दादा-दादी व घर के अन्य सदस्य जैसे- चाचा-चाची, बुआ आदि सभी साथ में रहते हैं। संयुक्त परिवार में अगर कभी किसी को कोई दिक्कत होती है तो एक दूसरे की सहायता के लिए पूरा परिवार जुट जाता है। बच्चों को छोड़कर ऑफिस जाना हो या कहीं बाहर जाना है तब भी निश्चिंतता के साथ जा सकते हैं। यहां बच्चों की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की नहीं बल्कि पूरे परिवार की होती है। इस संयुक्त परिवार में बच्चे संस्कार भी सीखते हैं, जो आगे चलकर उन्हें समाज में ना सिर्फ अच्छा स्थान दिलाता है बल्कि उनके वही पारिवारिक संस्कार उसे सफल बनने में मददगार भी साबित होते हैं।