सपना उस बुलबुले की तरह है जो जब तक हवा में तैरता रहे तब तक वो हक़ीक़त जान पड़ता है। और जब वह फूटता है एक पल में सब धराशायी। दीनू भी आख़िर इंसान ही था उसने भी सपना देखा।
साभार:
कहानी का नाम : सपना
कहानी के लेखक : मनमोहन कौशिक
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