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पंडित शादीराम निर्धन थे, परंतु दिल के बुरे न थे वे चाहते थे कि चाहे जिस भी प्रकार हो, अपने यजमान लाला सदानंद का रुपया अदा कर दें। उनके लिए एक-एक पैसा मोहर के बराबर था. अपना पेट काटकर बचाते थे, परंतु जब चार पैसे इकट्ठे हो जाते, तो कोई ऐसा खर्च निकल आता कि सारा रुपया उड़ जाता शादीराम के हृदय पर बर्छियां चल जाती थीं।
कहानी : एलबम
लेखक : सुदर्शन
स्वर : प्रीतिबाला
By Preeti Bala Kumarपंडित शादीराम निर्धन थे, परंतु दिल के बुरे न थे वे चाहते थे कि चाहे जिस भी प्रकार हो, अपने यजमान लाला सदानंद का रुपया अदा कर दें। उनके लिए एक-एक पैसा मोहर के बराबर था. अपना पेट काटकर बचाते थे, परंतु जब चार पैसे इकट्ठे हो जाते, तो कोई ऐसा खर्च निकल आता कि सारा रुपया उड़ जाता शादीराम के हृदय पर बर्छियां चल जाती थीं।
कहानी : एलबम
लेखक : सुदर्शन
स्वर : प्रीतिबाला