सुनीता का घर की साफ सफाई में अपने अभाव को भूलना। सोचना कि क्या इस बाहरी दुनिया से औरतों का कोई सरोकार नहीं है?क्या वाकई सबकुछ घर पर ही है?? बाहर क्या पाने के लिए निकला जाए?
सुनीता का घर की साफ सफाई में अपने अभाव को भूलना। सोचना कि क्या इस बाहरी दुनिया से औरतों का कोई सरोकार नहीं है?क्या वाकई सबकुछ घर पर ही है?? बाहर क्या पाने के लिए निकला जाए?