Maya's Magic

सुनो न


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सुनो ना
वो जो सर्दी में खाना खाने के बाद देहात के गुड़ की कसक बची रह जाती है न
या भर गर्मी में जब जीभ फिरती हो होठों पर
और कोई थमा दे गिलास भर नींबु पानी
और बरसात में जब मन डूबा डूबा सा हो
और हवा के परों पर बहता सा आए कोई
भूला बिसरा सा नगमा
वही तुम हो
बोलो ना
क्या तासीर है तुम्हारी
सर्द या गर्म
सर्दी में तुम्हारी बाहों की गरमाइश
तुम्हारे अधरों की नरमी
और कलेजे में क़तरा क़तरा कर उतरती ठंडक
बोलो ना
क्या तासीर है तुम्हारी
देखो ना
तुम कहते हो न
तुम मुझे इसलिए प्यार नहीँ करते
क्योंकि मैं भली सी दिखती हूँ
तो एक बार फ़िर उसी तरह जी भर कर देखो
जैसे देखा था उस रोज़ पहली बार
और बताओ निगाहों को, निगाहों से
क्यों करते हो प्यार?
©Maya ❤️
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Maya's MagicBy Maya Khandelwal