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बुद्धिमान मनुष्य अथवा साधक को अपनी इन्द्रियों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए l रस बुद्धि के अहंकार में पड़े रहना मनुष्य के पतन की संभावना को जीवित रखता है l अतः जिसकी इंद्रियाँ वश में हैं उसकी बुद्धि स्थिर है पार्थ...।
साधन की पूर्णता के लिये मेरे प्रति पूर्ण समर्पण और सत्य निष्ठा आवश्यक है,l मेरे प्रति समर्पित होने से इन्द्रियां सुगमता पूर्वक नियंत्रित हो जाती हैं............
....राधे राधे....l
By Dr. Rajnish Kaushikबुद्धिमान मनुष्य अथवा साधक को अपनी इन्द्रियों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए l रस बुद्धि के अहंकार में पड़े रहना मनुष्य के पतन की संभावना को जीवित रखता है l अतः जिसकी इंद्रियाँ वश में हैं उसकी बुद्धि स्थिर है पार्थ...।
साधन की पूर्णता के लिये मेरे प्रति पूर्ण समर्पण और सत्य निष्ठा आवश्यक है,l मेरे प्रति समर्पित होने से इन्द्रियां सुगमता पूर्वक नियंत्रित हो जाती हैं............
....राधे राधे....l