समय बढ़ता गया और रात गहरी हो गई।।।
आंखें सोने को त्यार नहीं, और नींद से जैसे बैरी हो गई।।।
वो याद थी तेरी या कुछ और था मालूम नहीं,
नाम जो आया तेरा, आंखें नम और रूह सुनहरी हो गई।।।
कहने को यूं वास्ता तो कइयों से होता है दिन में,
पर राब्ता जो तुझसे है वो किसी और से नहीं।।।
रात का तू पूछ ही मत,
ये दिन काटना ही कितना मुश्किल है तुझे क्या बताऊं।।।
मै बता सकता भी हूं तुझे, या शायद बता सकता भी नहीं।।।
- विशाल