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ये श्रीमती तिमक्का हैं। तिमक्का को ‘अम्मा’और ‘वक्षमृ ाता’ के नाम से भी जाना जाताहै। इनका जन्म कर्नाटक के तमुकुरु जिलेमें हुआ था। ये कर्नाटक में ही रहती हैं।पिछले ८० वर्षों से तिमक्का सड़कों केकिनारे पौधे लगा रही हैं। पैसे की कमीके कारण अम्मा ने आरंभ में एक खान मेंश्रमिक के रूप में काम किया था। तिमक्का‘सालमरदूा तिमक्का’ के नाम से भी जानी जातीहैं। ‘सालमरदूा’ कन्नड़ भाषा में पेड़ों की पंक्ति को कहते हैं। अत: उन्हें इसनाम से भी जाना जाता है।तिमक्का हुलिकल और कुदरुके बीच स्थित ४५ किलाेमीटर लंबेराजमार्गपर लगभग ३८५ बरगद के पेड़ लगाने के लिए विख्यात हैं। इनपेड़ों के कारण राजमार्ग अत्यंत रमणीय और ससुज्जित लगने लगा। इसकेअतिरिक्त उन्होंने अनेक स्थानों पर पेड़ लगाए जिनकी संख्या ८००० सेअधिक है। इनसे पर्यावरण को बहुत लाभ हुआ। इस कार्य में उन्हें उनकेपति ने भी परूा सहयोग दिया।उनके इस महत्वपर्णूकाम
https://ncert.nic.in/textbook.php?chve1=13-18
By Dr. Kritika Mathurये श्रीमती तिमक्का हैं। तिमक्का को ‘अम्मा’और ‘वक्षमृ ाता’ के नाम से भी जाना जाताहै। इनका जन्म कर्नाटक के तमुकुरु जिलेमें हुआ था। ये कर्नाटक में ही रहती हैं।पिछले ८० वर्षों से तिमक्का सड़कों केकिनारे पौधे लगा रही हैं। पैसे की कमीके कारण अम्मा ने आरंभ में एक खान मेंश्रमिक के रूप में काम किया था। तिमक्का‘सालमरदूा तिमक्का’ के नाम से भी जानी जातीहैं। ‘सालमरदूा’ कन्नड़ भाषा में पेड़ों की पंक्ति को कहते हैं। अत: उन्हें इसनाम से भी जाना जाता है।तिमक्का हुलिकल और कुदरुके बीच स्थित ४५ किलाेमीटर लंबेराजमार्गपर लगभग ३८५ बरगद के पेड़ लगाने के लिए विख्यात हैं। इनपेड़ों के कारण राजमार्ग अत्यंत रमणीय और ससुज्जित लगने लगा। इसकेअतिरिक्त उन्होंने अनेक स्थानों पर पेड़ लगाए जिनकी संख्या ८००० सेअधिक है। इनसे पर्यावरण को बहुत लाभ हुआ। इस कार्य में उन्हें उनकेपति ने भी परूा सहयोग दिया।उनके इस महत्वपर्णूकाम
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