सुवासिनी की दशा उस परिंदे की तरह है जो बंद पिंजरे में छटपटा भी नहीं सकता। दुख है लेकिन उसे बता भी नहीं सकता, क्योंकि यहाँ हवेली के मर्दों के सामने कोई कानून नहीं। सुवासिनी की इस गहरी पीर को बिसन के अलावा एक और इंसान ने समझा है। इसे जानने के लिए सुनते है दर्द और बिखराव के बीच झूलती सुवासिनी की कहानी।