एक उम्र ऐसी आती है,जब लोग आपको पसंद करे,यह चाह बेहद तीव्र हो जाती है।इस प्रयास मे किशोर अजीब सी होड मे शामिल हो जाते है।अपनी बेटी को ऐसी निरर्थक प्रतिस्पर्द्धा मे घिरता देख मनीषा का चिंतित होना स्वाभाविक ही था।
एक उम्र ऐसी आती है,जब लोग आपको पसंद करे,यह चाह बेहद तीव्र हो जाती है।इस प्रयास मे किशोर अजीब सी होड मे शामिल हो जाते है।अपनी बेटी को ऐसी निरर्थक प्रतिस्पर्द्धा मे घिरता देख मनीषा का चिंतित होना स्वाभाविक ही था।