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कई बार जीवन में हम सबके साथ होता है कि हम कुछ ऐसी परिस्थितियों के भवँर में फँस जाते हैं, जिनसे निकलना असम्भव सा लगने लगता है। हममें से ज़्यादातर लोग बने बनाए ढर्रे में चलने के आदी होते हैं, लीक से हटकर चलने का ज़ोख़िम नहीं उठाना चाहते। जब हम सारे बने बनाए रास्ते आज़मा लेते हैं और परिणाम हमारी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं मिलते तो हम थक कर बैठ जाते हैं और वही छोटी सी परिस्थिति एक विकराल समस्या में तब्दील हो जाती है। लेकिन यदि हम थोड़ी सी गम्भीरता और शांत मन से, ज़रा सा लीक से हटकर सोचने की ज़हमत उठाते तो शायद आसानी से निज़ात पा सकते थे। दुनिया में जितने भी कामयाब लोग हुए हैं, सभी ने लीक से हटकर चलने का ज़ोख़िम ज़रूर उठाया है।
By Manoj Shrivastavaकई बार जीवन में हम सबके साथ होता है कि हम कुछ ऐसी परिस्थितियों के भवँर में फँस जाते हैं, जिनसे निकलना असम्भव सा लगने लगता है। हममें से ज़्यादातर लोग बने बनाए ढर्रे में चलने के आदी होते हैं, लीक से हटकर चलने का ज़ोख़िम नहीं उठाना चाहते। जब हम सारे बने बनाए रास्ते आज़मा लेते हैं और परिणाम हमारी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं मिलते तो हम थक कर बैठ जाते हैं और वही छोटी सी परिस्थिति एक विकराल समस्या में तब्दील हो जाती है। लेकिन यदि हम थोड़ी सी गम्भीरता और शांत मन से, ज़रा सा लीक से हटकर सोचने की ज़हमत उठाते तो शायद आसानी से निज़ात पा सकते थे। दुनिया में जितने भी कामयाब लोग हुए हैं, सभी ने लीक से हटकर चलने का ज़ोख़िम ज़रूर उठाया है।