जीवन में संपूर्णता का रास्ता है अष्टांग योग
जीवन में संपूर्णता की खोज का रास्ता योग के जरिए ही जाता है। आंतरिक यात्रा योग से ही मुमकिन है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि अगर उन्हें कोई दर्द या बीमारी नहीं है, तो वे स्वस्थ हैं, लेकिन वे शरीर मस्तिष्क के बीच असंतुलन के बारे में नहीं जानते। योग का शरीर पर तीन गुना प्रभाव होता है, सेहतमंद व्यक्ति को और स्वस्थ बनाता है। बीमारी बढ़ने से रोकता है, तेजी से स्वास्थ्यसुधार करता है।
योग सिर्फ आसन नहीं है, अष्टांग योग है। इसका पहला अंग है-यम। इसमें सत्य व अहिंसा का पालन करना, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य का पालन है। दूसरा अंग है नियम ईश्वर की उपासना, स्वाध्याय, तप, संतोष और शौच। तीसरा अंग है आसनों का अभ्यास यानी योगासन आसन शरीर की ताकत और स्वास्थ्य का संतुलन बनाए रखते हैं। चौथा अंग श्वास की तकनीकों या प्राणायाम से संबंधित है। श्वास ही चेतना का आधार है, श्वास को धीमा करके और उसे देखकर हम हमारा ध्यान बाहरी इच्छाओं जैसे वासना आदि से हटाकर बुद्धिमत्तापूर्ण चेतना यानी प्राणों पर लगा सकते हैं।
प्रत्याहार पांचवा अंग है। मतलब इंद्रियों को आंतरिक दिशा की ओर मोड़कर हम दिमाग का नियंत्रण, रिक्तता महसूस कर सकते हैं। आखिरी तीन अंग हैं, एकाग्रता यानी धारणा, ध्यान और समाधि।
- विख्यात योगगुरु बीकेएस अयंगार की किताब 'लाइट ऑन लाइफ से साभार