Ruhaani Poems

विपरित


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विपरित हमेशा ही इक दूसरे को
आकर्षित करता है
और वो साथ ही रहते हैं
चुंबक के दो ध्रुव के बारे मे
सब जानते है इसलिए मानते भी है
जीवन के साथ हर पल मृत्यु भी है
दिन है तो रात भी है ...
उजाला है तो अंधेरा होगा ही
सुख हमेशा दुःख का साथी है
मित्र और शत्रु, स्त्री और पुरुष भी
मिलन और बिछोह, नदी के किनारे भी,
बस मन मानना नहीं चाहता
इंसान जन्म चाहता है मृत्यु नहीं
मिलन चाहता है वियोग नहीं
मगर सच तो इससे उल्टा है
इक के साथ दूसरा सतत घट रहा है
ये दिखते विपरित है मगर
हैं तो ये इक दूसरे के पूरक ही
इक के बिना दूसरे का कोई
अस्तित्व नहीं ...सुमन
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Ruhaani PoemsBy Suman Rakesh Shah