जब नौकरी, सफ़लता और तरक्की आपकी काबिलियत, हुनर के दम पर नहीं बल्कि आपके परिवार के हवाले और रसूख़ पर मिलती है। तब वह विरासत और सोच कुकरमुत्ते की तरह फैलती जाती है।
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