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"मेरा अनुसार चालके के ज्ञान जो उन्होंने उनके समय पर लोग उनके ही शिक्षकों को दिया बांध दिया था और उनको ज्ञान दिया था वो आज भी देश के लिए और हमारा एजुकेशन सिस्टम के लिए बहुत ही इम्पोर्टेंट है और बहुत ही रेलमेंट भी है क्योंकि 1 उनके जमाने में सोचना बहुत ही इम्पोर्टेंट था अब लोग सोचते नहीं है सब उनको सोचने का टाइम नहीं मिलता उनको और सोचने में बहुत आलसी है उनको जवाब नहीं मिला तुरंत फोन खोल कर वो आंसर ढूंढ लेते हैं और उनके ही और जो जवाब उनको दिया जाता है उस जवाब का आंसर ढूंढते हैं और किसी वो खुद को कोई सवाल नहीं उठाते हैं क्वेश्चन नहीं करते हैं कि यह ऐसा क्यों है वो ऐसा क्यों है और चाणक्या ने हमें सिखाया कि सोचना सिर्फ चाणकानहीनहीकईसरे बहुत ही महत्वपूर्ण लोगों ने हमको बोला है कि सोचना बहुत इम्पोर्टेंट है कि हम कुछ भी करने से पहले यह हमको सोचना है और कई सारे सवाल भी उठना उठाना चाहिए क्योंकि जब हम सोचना बंद करते हैं और 1 किसी और पर रिलाय करते हैं तो हम मनुष्य का 1 बहुत ही इम्पोर्टेंट कैरेक्टरिस्टिक जो है उसे उसको ऑफ कर रहे हैं बंद कर रहे हैं और 1 पिंजरे के अंदर हम खुद खुद रहे हैं तो सोचना बहुत इम्पोर्टेंट है और चालक का ज्ञान अभी भी देश के लिए एजुकेशन सिस्टम के लिए हमारा वैज्ञानिक डेवलपमेंट जो हमको मिला है वो दोनों को कंबाइंड करके हमको 1 प्रॉपर एजुकेशन सिस्टम जो रेलेवेंट है जो ऑप्टिबेट है जो हमारा पुराने चीजों को न भूल कर पुराने जो हमारा प्रिंसिपल है उन सबको न भूलकर 1 एजुएडिकेशन सिस्टम बना कर सकते हो और वो बहुत ही अच्छा होगा।"