My Poetry

ये कैसे सपने मेरे


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कुछ दिन पहले की बात ये
दोस्त ने जगाए अरमान मेरे
जो रास्ता था बंद पडा
वो खुला और मैं गिर पडा
बात ये कि शादी के सपने देखे
जीवन के हसीन पल स्वप्न मे लेके
चला मैं खुशिया ढूंढते
पर कुडंली ना मिला फिर रो बैठे
था सिर्फ मेरा दोश
सब कहे मत खो होश
पर मासूम दिल को कौन बताए
वो करे जो उसका मन चाहे
कोई नही, है समंदर में कई सारे
रास्ता खोला अब बंध ना होवे
ढूंढता रहूँ अब हो ना पावे
ओ उपर वाले कभी तो हर्ष दे
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My PoetryBy Rajeev Bhatta