यह कहानी है एक लड़के की जिसका नाम संजू है वह एक साधारण परिवार में रहता है संजू के पिता अभी अपनी नौकरी से सेवा निवृत हुए है माँ अक्षर बीमार रहती है दो बहने हैं एक की हल ही में शादी हुई है और दूसरी अभी पढाई कर रही है शादी शुदा एक बड़ा भाई है जो नौकरी करता है
संजू अभी ग्रेजुएशन कर रहा है उसके बड़े सपने है वह चाहता है की उसे जीवन में सफलता मिले और उसे एक एसी नौकरी मिले की जहाँ वह बॉस हो उसकी सैलरी लाखों में हो उसके पास बहुत बड़ी और महंगी गाड़ी हो बहुत ही सुन्दर गर्ल फ्रेंड हो जिस से वो शादी कर सके और अपने पूरे परिवार को एक बहुत अच्छी जिंदगी दे सके
संजू रोज कॉलेज जाता था उसके बहुत सरे दोस्त थे और दोस्तों के साथ मोज मस्ती में समय केसे निकलता था उसे पता ही नहीं चलता था कॉलेज जाना और सभी से मिलना उसे बहुत पसंद था कभी कभी कॉलेज की क्लासेज से बंक भी मर लेते थे
बारवीं करने के बाद जो आजादी मिली थी उसका पूरा मजा संजू ले रहा था कोई टोकने वाला नहीं था जैसा मन में आता या जेसा दोस्तों क विचार होता वेसा ही करते कभी घूमने जाते कभी सिनेमा हॉल कभी दोस्तों के यहाँ और न जाने क्या क्या
पर संजू ने सपने देखने कभी बंद नहीं किये उसे लगता था की बस ग्रेजुएशन पूरा होते ही वह जॉब के लिए अप्लाई करेगा और फिर उसकी बहुत अच्छी जॉब लग जाएगी
जब भी वे सरे दोस्त साथ होते तो बड़ी बड़ी बातें किया करते थे और एसा लगता था जेसे अपने सपनो की नौकरी पाना बहुत आसन है उन्हें लगता था जो लोग एसा नहीं कर पते हैं वो उनकी तरह न तो सोचते हैं और न ही उनमे इतना दिमाग और टैलेंट हैं संजू को लगता था वो सबसे अलग है वह एक्स्ट्रा आर्डिनरी है
पिता ने नौकरी में कमाया सारा पैसा संजू की माँ की बीमारी में लगा दिया था संजू की बहन की शादी करने के लिए पिता ने घर गिरवी रख दिया था अब घर का सारा खर्चा संजू के बड़े भाई की कमाई से ही चलता था
एक दिन किसी अनबन के चलते बड़े भाई अपनी पत्नी सहित घर छोड़ कर चला गया
पिता क्योंकि प्राइवेट जॉब पर थे तो पेंशन नाम की कोइ चीज नहीं थी अब घर के खर्चे के लिए पिता को फिर से काम ढूँढना था न चाहते हुए भी
इसका असर संजू पर भी पड़ने लगा अब उसे जेब खर्च के लिए पैसे तो मिलना दूर अब मुफ्त में ताने मिलने लगे थे
इस बीच एक दिन संजू अपनी भाभी को मानाने के लिए गया तो
भाभी ने बोला तुम सबने तो अपने ऐश और आराम के लिए मेर पति को इतने समय से बवकूफ बनाये रखा
आज फिर अगये चले जाओ और दोबारा कभी मत आना
हमारी बाला से तुम केसे भी रहो हमे तुमसे कोई लेना देना नहीं
संजू पर मनो वज्रपात हो गया हो
मासूम सा संजू जिसे लगता था की एक अच्छी नौकरी लोखों की सैलरी और बड़ा घर पाना बहुत आसन काम है
आज उनका परिवार एक वक़्त के खाने को भी मोहताज हो गया था
संजू के ऊपर बहुत दबाव बन गया उसने नौकरी के लिए फॉर्म भरना शुरू कर दिया अब ग्रेजुएशन के फाइनल एग्जाम भी समीप ही थे उसने अपने फाइनल एग्जाम के साथ नौकरी के लिए अन्य एग्जाम की तयारी भी शुरू कर दी
कुछ ही दिनों में अधिकतर एग्जाम हो गए इधर संजू के घर ही स्तिथि और भी गंभीर होती चली गयी उसके पिता को कोई नौकरी नहीं मिल पाई घर चलने के लिए उन्होंने लोगों से उधार लिया और जैसे तेसे घर चलाया परन्तु अब लोग अपना कर्जा मांगने आने लगे थे कर्जा बहुत तो नहीं था पर आज वे उसे चुकाने की स्थिथि में नहीं थे
घर अब घर कम और torcher सेल ज्यादा हो गया था सभी का मूड हमेस बहुत ही चिड चिड़ा रहता था बात बात पर सब एक दुसरे को टोकते रहते थे
संजू का ग्रेजुएशन का रिजल्ट अगया था वह अच्छे नंबर से पास हो गया पर बाकि नौकरियो के लिए दिए गाय किसी भी एक्साजम में पास नहीं हो पाया वह लगातार डिप्रेशन का शिकार होता जा रहा था
उसी दिन कर्जदार भी जमानत के तौर पर उसकी सबसे पायरी motercycle अपने साथ ले गये
पिताजी अपनि स्कूटी पहले ही बेच चुके थे
संजू से छोटी बहन जो अभी १२ वीं में थी ने भी परिवार को सपोर्ट करने के लिए पास ही की दरजी की दुकान पर सिलाई और जरी का काम करना शुरू किया परन्तु फिर भी घर की मुसीबतें कम नहीं हो रही थी
एक दिन की बात है संजू लोकल ट्रेन से वापस घर को जा रहा था बहुत ही परेसान और दुखी अपने आप में खोया हुवा इस उधेड़ बुन में की कैसे उनके पूरे परिवार का जीवन फिर से पहले जैसा हो पायेगा
ट्रेन में उसकी नजर एक बैग पर पड़ी उसपर कुछ लिखा हुवा था पर वह अंग्रेज