PURE ZINDAGI

युद्द पर कविता - कितने मर गए सर


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कितने मर गए सर .....

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जब मेरा घर पानी में डूब गया

मैंने भरत जी को बुलाया

मैंने कहा मेरे घर को पानी से बाहर निकालिए

वे बोले आता हूं मैंने कहा कब से वे मुस्कुराए बोले कल से ही

भरत जी के साथ राम दयाल आए

और कुछ दिनों बाद जगनारायण

जो दूसरे दिन लालो को साथ लेकर आए

घर इन दिनों गुंजाएमान रहता है

उसे पानी से बाहर निकाला जा रहा है

आठ दिनों से उक्रेन में बमबारी हो रही है

लोग मर रहे हैं जान बचाने को भाग रहे हैं

मैं जग नारायण जी को उक्रेन की कहानियां सुनाता हूं

खेसारी के साग का गुण गाता हूं

जो गांव से जगनारायण लेकर आते हैं

वे प्यार जताने के लिए कहते हैं

सर जबतक यहां आना है घरवाली से कहूंगा

रोज मुझे साग बनाकर दो

उक्रेन तबाह हो रहा है

उसकी इमारतों पर बम फट रहे हैं

मेरा घर पानी से निकाला जा रहा है

आज की जहां तक बात है भरत जी नहीं आ पाए हैं

कल आकर बताएंगे लड़की की शादी में आने वाली मुश्किलें दहेज का हाल

मैं कहूंगा जमीन जायदाद मत देखिए लड़के की योग्यता हुनर देखिए

मैं सुबह जाग जाऊंगा

लालो भी मेरे लिए कल कुछ लेकर आएंगे

उक्रेन जलता रहेगा

और राम दयाल मुझसे जगनारायण के बारे में हंसते हुए कहेंगे

बोलता बहुत है मगर आदमी सच्चा और मजेदार है

भरत जी अचानक कमर सीधी करते लंबी तान लेते हुए पूछेंगे

आज कितने मरे गए सर

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कवि - अमिताभ बच्चन

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PURE ZINDAGIBy Manoj Srivastava। TV host । Centrist