नवरात्र व्रत हिंदू धर्म में वही थी महत्वपूर्ण माना जाता है इससे हमारा शरीर स्वस्थ होता है मन भी स्वस्थ होता है और इस व्रत को यदि हम सिस्टमैटिक ढंग से करते हैं तो हमें इससे हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस मिलती है और हमारा जीवन खुशियों से भरा था इस व्रत को रहने के लिए अलग-अलग तरह से लोग रहते हैं। यहां हम कुछ चीजें आपको बताएंगे जिस तरह से हम इस व्रत को बहुत सुगमता से रह सकते हैं और मैक्सिमम बेनिफिट्स ले सकते हैं । दोस्तों इस व्रत को हमने निराजल रह सकते हैं ,जल उपवास के साथ रह सकते हैं ,नींबू पानी पीकर रह सकते हैं ,फलाहार रह सकते हैं या एक टाइम भोजन करके रह सकते हैं। अपक्कव आहार खा कर सकते हैं, साकाहार रह सकते हैं । इस तरह से कई तरह से हम अपने शरीर के स्वास्थ्य के लिए इस व्रत को कर सकते हैं लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के लिए, उज्जवल भविष्य के लिए, जरूरी है कुछ मानसिक व्रत रहना । जैसे कि हम क्रोध न करने का संकल्प ले सकते हैं ,हम निंदा चुगली नहीं करने का संकल्प ले सकते हैं ,हम किसी की बुराई न करने का संकल्प ले सकते हैं, हम किसी को गाली गुप्ता ना देने का संकल्प ले सकते हैं, हम किसी की हेल्प करने का संकल्प ले सकते हैं। हम समय दान देने का संकल्प ले सकते हैं, हम अच्छी किताबों को पढ़ने का संकल्प ले सकते हैं, हम अच्छी संगत में रहने का संकल्प ले सकते हैं ,हम एक-दो दिन या नौ दिन मौन व्रत का संकल्प ले सकते हैं। इस तरह से हम कई प्रकार से इस व्रत को कर सकते हैं। हमारा निवेदन है कि आप इस व्रत को शारीरिक आहार उपवास के साथ-साथ मानसिक संकल्प के साथ भी अवश्य करें । जो भी आपको अच्छा लगता हो और वो व्रत अपनाएं। कुछ बुराइयों को छोड़ने का संकल्प ले सकते हैं, जैसे दारू गांजा भांग तमाकू नही खाने,पीने का संकल्प ले सकते हैं, कि किसी को गलत दृष्टि से नहीं देखेंगे यह संकल्प ले सकते हैं। हो सके तो मानसिक और शारीरिक दोनों व्रत कर सकते हैं। मेरे हिसाब से अगर एक ही रहना है उपवास रख लीजिए और उसके साथ-साथ मानसिक रखिए क्योंकि आज मन का व्रत रखना बहुत जरूरी हो गया धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद