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By Ravi ShuklaScienceLife Sciences
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  • योग वाशिष्ठ वैराग्य प्रकरण अध्याय 3
    योग वाशिष्ठ वैराग्य प्रकरण अध्याय 3
    जीवन मुक्ति के स्वरूप पर विचार जगत के मिथ्यात्व तथा द्विविध वासना का निरूपण तथा भगवान श्री राम की तीर्थ यात्रा का वर्णन।
    14 min
  • योग वशिष्ठ वैराग्य प्रकरण अध्याय 02
    योग वशिष्ठ वैराग्य प्रकरण अध्याय 02
    इस शास्त्र के अधिकारी का निरूपण, रामायण के अनुशीलन की महिमा, भारद्वाज को ब्रह्मा जी का वरदान तथा ब्रह्मा जी की आज्ञा से वाल्मीकि का भारद्वाज को संसार दुःख से छुटकारा पाने के निमित्त उपदेश देने के लिए प्रवृत्त होना।
    11 min
  • योग वशिष्ठ वैराग्य प्रकरण अध्याय 01
    योग वशिष्ठ वैराग्य प्रकरण अध्याय 01
    सुतीक्ष्ण और अगस्त्य, कारुण्य और अग्निवेश्य, सुरुचि और देवदूतों तथा अरिष्टनेमि और वाल्मिकी के संवाद का उल्लेख करते हुए भगवान राम के अवतार में ऋषियों के श्राप का कारण बताना।
    योग वशिष्ठ सनातन परंपरा का बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है बिना योग्य वशिष्ठ को पढ़े या सुन हम भगवान राम के बारे में नहीं जान सकते इसलिए जो भी राम भक्त हैं उनके लिए यह अनिवार्य है कि वह योग वशिष्ठ का अध्ययन श्रवण अवश्य करें।
    31 min
  • वास्तविक स्वतंत्रता क्या है?, क्या आप सचमुच आजाद हैं?
    वास्तविक स्वतंत्रता क्या है?, क्या आप सचमुच आजाद हैं?
    वास्तविक स्वतंत्रता अपने आप में एक बहुत बड़ी चीज है और यह हमसे बहुत बड़ी कुर्बानी मांगती इसमें हमारी जान भी जा सकती है। देखा जाए तो मनुष्य जीवन आजाद पंछी की तरह जीने के लिए ही मिला लेकिन हम गुलामी के इतने अभ्यास हो गए हैं की आजादी का त्यौहार मानते तो हैं लेकिन उसकी तरफ कदम बढ़ाना नहीं जानते।
    24 min
  • जाति क्या है, ब्राह्मण कौन है, शरीर, जाति,ज्ञान, कर्म,धर्म, या कुछ और ही?
    जाति के बारे में बहुत कुछ इस समाज में फैलाया गया है कहां जा रहा है कोई अपने आप को दलित समझ के हीन भावना से ग्रसित है कोई अपने आपको ब्राह्मण समाज के फूल जा रहा है। इसमें आपको बताने की बात है की जाति का मतलब ही काल्पनिक है व्यवहारिक है इसमें कोई सत्यता नहीं है इसलिए आप अपने आप को जो चाहे वह समझ सकते हैं क्षत्रिय समझ सकते हैं वैसे समझ सकते हैं शूद्र समझ सकते हैं जो चाहे वह समझ सकते हैं । लेकिन ब्राह्मण नहीं समझ सकते क्योंकि ब्राम्हणत्व कर्म ज्ञान जाति धर्म वर्ण इन सबसे ऊंचा और अलग जाति गुणधर्म से परे इस पॉडकास्ट में आपको यह पता चल जाएगा कि वास्तव में जाति क्या है और ब्राम्हण तो क्या है आशा है आपको अच्छा लगेगा इसे शेयर करें और सब्सक्राइब करिए धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद।
    27 min
  • स्वर्ग और नर्क क्या है।
    स्वर्ग और नर्क की परिकल्पना केवल मनुष्य के लिए जानवरों के लिए नहीं क्योंकि जानवरों का जो जीवन है वह केवल भोग के लिए योग के लिए नहीं है जानवर के पास कोई ऑप्शन नहीं है कि अपनी चेतना को ऊपर उठा पाए यदि उनकी चेतना ऊपर नहीं उठती है तो उनके पास एक सिक्योरिटी भी है कि उनकी चेतना नीचे भी नहीं जाती मतलब जिस लेवल पर उनकी चेतना जन्म के समय रहती है उसी लेवल पर वह हमेशा बनी रहती है लेकिन मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है यदि मनुष्य इंसानियत से भरा जीवन जी रहा है करुणा दया सहयोग खुशी आनंद आदि से भरपूर जीवन जी रहा उसकी चेतना ऊपर की तरफ जा रही है अन्यथा उसकी चेतना नीचे की तरफ चली जाएगी यदि वह काम क्रोध लोभ मोह इससे देश जलन इस से परिपूर्ण जीवन जी रहा है यही पहचान है अपनी चेतना को समझने का यदि हमारे अंदर दया करुणा क्षमा आनंद खुशी प्रसन्नता सहयोग यह सब चीजें बढ़ रही है तो साफ है कि हमारी चेतना का उत्तरोत्तर विकास हो रहा है और यदि यह चीजें नहीं बढ़ रही है तो हमारी चेतना निम्रता की तरफ जा रही है अब हमारी चेतना का विकास होता है स्वर्गीय जीवन जीते हैं। और जब हमारी चेतना नेता की तरफ जाती है कोन्नर्क से परिपूर्ण जीवन जीते हैं। यही जीवन स्वर्ग और नरक है यदि हम विकारों के वशीभूत होकर के जीवन जीने तो जीवन में नर्क है और यदि हम दया करुणा प्रेमानंद से परिपूर्ण जीवन मस्ती भरा जीवन जी रहे और दूसरों को भी यह जीवन जीने में मदद कर रहे हैं तो हमारा जीवन स्वर्ग में है यही स्वर्ग और नरक की पहचान धन्यवाद धन्यवाद
    8 min
  • जरा विचार करें कि आप क्या हैं, मनुष्य या मनुष्य रूप में जानवर।
    दोस्तों हमारे सारे दुखों का कारण है कि हमें अपनी असलियत पता ही नहीं हम अपने आप को मनुष्य मानते हैं लेकिन वास्तव में हम मनुष्य है नहीं हम तो मनुष्य रूप में जानवर है क्योंकि हमारे जो भी कर्म है शत शत प्रतिशत जानवरों से मिलते हैं एक भी कर्म हम ऐसा नहीं करते कि जो हमें जानवरों से ना मिलता हूं हमारे में और जानवरों में बहुत समानता है और जानवर कुछ माने में हमसे श्रेष्ठ है और कुछ माने में हम जानवरों से श्रेष्ठ है एक चीज केवल हमें मनुष्य बनाती है लेकिन वह काम हम करते ही नहीं मनुष्य जन्म कई जन्मों के बाद मिलता है मनुष्य जन्म के लिए कहा गया है कि मनुष्य जन्म देवताओं को भी दुर्लभ जानते हैं क्यों क्योंकि मनुष्य जन्म से के द्वारा ही परमात्मा की प्राप्ति होती है मनुष्य का जन्म परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिलता है मुक्ति जीवनमुक्ति के लिए मिलता है इस जन्म मरण के बंधन से छुटकारा पाने के लिए मिलता है न कि भोगने के लिए जानवरों की है। मनुष्य जन्म भोगने के लिए नहीं है मनुष्य जन्म है त्याग तपस्या का जीवन जीते हुए परमात्मा को प्राप्त करने का लेकिन मनुष्य जन्म के बाद हम में से ज्यादातर लोगों को तो पता ही नहीं रहता है कि मनुष्य जन्म हमें मिला क्यों है। इसी कारण लोग भ्रम में रहते हैं और इसी कारण लाख ईश्वर हमारे पास हो जाए अथाह संपत्ति हो जाए पूरे विश्व का शासन हो जाए फिर भी हमें शांति नहीं मिलती क्यों क्योंकि हमारा जन्म ही हुआ है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए और जब तक हम परमात्मा को प्राप्त नहीं करते उसमें मिल नहीं जाते उसमें मिट नहीं जाते तब तक हमें शांति नहीं मिलती इसलिए आप अपने आपको चेक करिए देखिए कि आप कौन सी जिंदगी जी रहे जानवरों वाली कि मनुष्य वाली क्योंकि मनुष्य रूपी जानवर का जन्म तो आपको सहज मिल गया है मनुष्य बनने के लिए आपको परिश्रम करना पड़ेगा उसके लिए तब करना पड़ेगा तपस्या करनी पड़ेगी तब जाकर आपको मनुष्य जन्म मिलेगा और वह मनुष्य जन्म आपके प्रयास से मिलेगा और फिर आप परमात्मा की प्राप्ति की तरफ अग्रसर हो जाएंगे। जब तक आपका कदम परमात्मा की प्राप्ति के तरफ नहीं जाता है जब तक आप काम क्रोध लोभ मोह अहंकार पद प्रतिष्ठा कि जंजाल में गिरे हुए तब तक आप मानव नहीं है तब तक आप जानवर है जब परमात्मा की तरफ आप कदम बढ़ा देंगे तब जानवर से मनुष्य बनने की तरफ अग्रसर हो जाएंगे आज इतना ही बहुत-बहुत धन्यवाद यदि पसंद आए तो शेयर करें सब्सक्राइब करें।
    13 min

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