गहराई में जड़ें और अडिग विश्वास | आत्मिक यात्रा EP-001 | Daily Devotional by Premasis Satman
कभी आपने सोचा है कि कुछ लोग विश्वास में तेज़ी से आगे बढ़ते हैं लेकिन थोड़े ही समय में गिर जाते हैं? यीशु ने बीज बोनेवाले के दृष्टांत में बताया कि जो लोग उथली ज़मीन में बोए जाते हैं, वे शुरुआत में आनन्द से वचन को ग्रहण करते हैं, लेकिन जब परेशानी आती है, तो वे टिक नहीं पाते। क्यों? क्योंकि उनकी जड़ें गहरी नहीं होतीं (मरकुस 4:16-17)।
एक पौधा जो गहरी मिट्टी में जड़ें जमा लेता है, वह धूप, आँधी या सूखे में भी खड़ा रह सकता है। इसी तरह, हमारा विश्वास तभी अडिग होता है जब हम परमेश्वर के वचन में गहराई से जड़ें जमाते हैं। सतही विश्वास देखने में अच्छा लग सकता है, लेकिन यह स्थायी नहीं होता।
यह डिवोशनल आपको चुनौती देता है कि आप खुद से पूछें: “क्या मैं केवल दिखावे के लिए चल रहा हूँ या वाकई गहराई से परमेश्वर के वचन में स्थिर हूँ?”
आपके जीवन की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि आप परमेश्वर के सत्य में कितने गहरे हैं। कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन अगर आप वचन में जड़ें जमाए हैं, तो कोई भी आंधी आपको गिरा नहीं सकती।
आज का आत्मिक संदेश आपको एक ऐसा विश्वास अपनाने के लिए आमंत्रित करता है जो केवल भावनाओं पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन की गहराई पर आधारित हो — एक ऐसा विश्वास जो अडिग है, स्थिर है, और फलदायी है।
लेखक: Premasis Satman
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मुख्य पद: मरकुस 4:16-17 – “जो पथरीली भूमि में बोए जाते हैं… जब वे वचन को सुनते हैं तो तुरन्त आनन्द से ग्रहण करते हैं, परंतु वे अपने में जड़ नहीं रखते और थोड़े ही दिन के लिए ठहरते हैं…”
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