
Sign up to save your podcasts
Or


ज़िंदगी की भाग-दौड़ और रोज़ की कश्मकश में ख़ुद की पहचान ख़त्म करके घर-परिवार के लिए काम करने वाली एक औरत भी एक मक़ाम पर जीना चाहती है- अपने लिए। घर वालों की सलामती और उनकी ज़िंदग़ी को पटरी पर बनाए रखने के लिए ख़ुद के बारे में नहीं सोचने वाली महिला जब ठहरकर सोचे तो लगता है कि कुछ पल तो ख़ुद के लिए भी जीने चाहिए। ऐसी ही कुछ पंक्तियाँ रेडियो सबरंग की रमणी श्याम की कलम से-
By Radio Sabrangज़िंदगी की भाग-दौड़ और रोज़ की कश्मकश में ख़ुद की पहचान ख़त्म करके घर-परिवार के लिए काम करने वाली एक औरत भी एक मक़ाम पर जीना चाहती है- अपने लिए। घर वालों की सलामती और उनकी ज़िंदग़ी को पटरी पर बनाए रखने के लिए ख़ुद के बारे में नहीं सोचने वाली महिला जब ठहरकर सोचे तो लगता है कि कुछ पल तो ख़ुद के लिए भी जीने चाहिए। ऐसी ही कुछ पंक्तियाँ रेडियो सबरंग की रमणी श्याम की कलम से-